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स्वदेशी दीपावली : इस बार मेड इन चाईना की जगह गोबर के बने दियों से रोशन होगा शिमला

दीपावली का पर्व आने वाला है। हर व्यक्ति दिवाली के दिन अपने घरों को खूबसूरत लाइटों और दियो से सजाना चाहता है। दीपावली का मतलब ही दीयों की कतार होता है। ऐसे में दीपावली पर दिये सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अभी तक हर साल लोग चाइनीज लाइट्स और दिए खरीदा करते थे। लेकिन इस बार भारत और चाइना के बीच बॉर्डर पर हो रहे विवाद की वजह से लोगों का चाइनीज प्रोडक्ट खरीदने से मन उठ गया है।

बता दें कि भारत में त्योहारों के दौरान चाइनीज प्रोडक्ट्स का ही बोलबाला रहता था। लेकिन इस बार चाइना ने देश को कोरोना वायरस और फिर बॉर्डर पर परेशान करके दोहरी जंग लड़ने के लिए मजबूर कर दिया है। पीएम मोदी ने भी लोगों से आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम बढ़ाने की अपील की थी। जिसके मद्देनजर इस बार स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने की पहल की जा रही है।

गोबर से बनाए जाएंगे दिये

आत्म निर्भर भारत की ओर पहल करते हुए राष्ट्रीय कामधेनु आयोग ने इस दीवाली के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने इस बार दीपावली के अवसर पर गोबर से बने दिये इस्तेमाल करने का लक्ष्य रखा है। आयोग के इस अभियान में उन्हें शिमला की गौशाला से मदद मिल रही है। गौशाला इस अभियान को पूरा करने के लिए गोबर के दिये तैयार कर रही है। चाइनीज़ प्रोडक्ट का बहिष्कार करके इस तरह की पहल करना देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभदायक होगा।

स्वदेशी चीजें अपनाने की की जा रही है अपील

शिमला स्थित कामनापूर्णि गौशाला के सदस्य खुद गोबर के दिये तैयार कर रहे हैं। वे दिवाली के लिए 10 हजार दिये तैयार करने वाले हैं। एक दिये की कीमत करीब 10 रुपए बताई जा रही है। समिति के सदस्य लोगों को समझा रहे है कि उन्हें भी विदेशी चीजों को छोड़ कर स्वदेसी चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने लोगों को इसका महत्व भी समझाया है कि किस प्रकार यह देश की गिरती अर्थव्यवस्था को फिर से संभालने में मदद कर सकता है। 

गोबर के लिए से होगी लक्ष्मी जी प्रसन्न

गौशाला समिति का मानना है कि हिंदू मान्यताओं के अनुसार गोबर मे लक्ष्मी जी का वास होता है। अगर गोबर के दिये बनाकर लगाएं जाए। तो उस घर में लक्ष्मी जी जरूर प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाएगी। इसी वजह से उन्होंने इस बार गोबर के दिये बनाने का लक्ष्य रखा है। बता दे कि राष्ट्रीय कामधेनु आयोग का लक्ष्य है कि इस साल दिवाली पर ज्यादा से ज्यादा परिवारों में गोबर के दिये ही जलाए जाएं। इसके लिए आयोग लोगों को गोबर के दिये बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। वे चाहते हैं कि करीब 11 करोड़ परिवारों में गोबर के दिये लगाए जाएंगे। 

ऐसे बन रहे हैं दिये

गोबर के दिये बनाने के लिए गोबर के साथ साथ बुरादा, चावल का आटा ओर मुल्तानी मिट्टी यानी चिकनी मिट्टी का प्रयोग भी किया जा रहा है। गाय के गोबर को सुखाने के बाद का पाउडर बनाकर बाकी चीजों के साथ मिक्स करके दिए बनाए जा रहे हैं। गोबर के दीए बनाने के लिए जो भी सामान इस्तेमाल हो रहा उसके पाउडर को बनाने के लिए मशीनों का प्रयोग भी हो रहा है।

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